यह अहिबो-गरीब सवाल में पूछ रहा हूँ
दील में यह मलाल न होता तो क्या होता
यह जिंदगी तेरे बगैर कुछ भी नहीं
यह भ्रम ही होता, तो अच्छा होता
कब तक इन टूटे सपनो को सँजोता रहूँ
मेरे यहाँ भी एक कटोरा होता, तो क्या होता
पूरी क़ायनात तुझसे दूर करने में लगी है
मेरे पास समुंदर होता, तो क्या होता
भटकता रहता हूँ, लहरों की थपेड़ो में
यदि किनारा न होता, तो क्या होता
नजर से नजर ही न मिलते कभी
आँखों में तेरे सुरमा न होता तो क्या होता
हमारे सीने में भी एक टूट दिल रहता है
तुम्हारे पास आईना होता, तो क्या होता
तुम से मिलकर गले लगा ही लेते
मर्यादा की बेड़ी न होती तो क्या होता
मर्यादा की बेड़ी न होती तो क्या होता
ये दुनिया बनाने बाले देख यहाँ आकर
मुझे कलम दे दिया होता तो यह सब न होता

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