नजरो का क्या है
दिल से है मोहब्बत हमारी
इतना क्यों सबरते हो
जब इस दिल के आगे
कोई कीमत ही नही तुम्हारी
इस हुस्म के नुमाइंदे
और भी बहुत होंगे
हम कामदेव तो नही
जो कामना में बह जाए
रिस्ता दिल से है
इसके आगे न कोई
हसरत नही हमारी
दिल से है मोहबत हमारी
बखूबी रिस्ते निभाते है लोग
प्यार के नाम पर
बहुत तड़पाते है लोग
कामना को अपनी
बासना से मिटाकर
यही ठुकरा जाते है
फिर इस रिश्ते को
न कोई अपनाते
रीति की नियति
खुद ही बनाते
इसलिए कोई
बासना नही हमारी
दिल से है मोहबत हमारी
अब भी यदि कर लो
तुम हमसे प्यार
खुली किताब हम
चाहो तो पड़ लो
बाद में न कहना
की यह क्या हो गया
हम नही बदलेगे
चाहे जमाना बदल जाय
आप बदल भी जाय
तो कोई बात नही
दिल को न आपने बदलना
इसी के आगे न कोई
तमन्ना नही हमारी
दिल से है मोहबत हमारी

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