मानसून

Share:

मानसून तो एक बहाना है
छत पर निकले परिंदे,
उड़ती चिड़िया पर निशाना है
ताप्ती धूप और मुखड़े पर पर्दा
छट गई धूल, आखो में जर्दा
बिछड़े को मिल मिलाये
नदी-नाले सब हर हर गंगा
तुम भी अधूरे, हम भी अधूरे
फिर क्यों बंधक में रहे
बांध के लंगोट नंगा
तोड़ हाथो की हथकड़ी
दिल के पट भी खोल दे
जिसका इंतिजार था तुझे
आते ही उसके चुप्पी साध ली
वर्षा तेरी मुस्कान से ही
घर पर उसने पन्नी छा ली
बुरा न मान यह नियति है
कल तेरे जाने की खबर भी
तुझ ही को सुन्नी है।।।।

No comments