हौसले बुलंद हैं

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हौसले बुलंद है 
आँखे मंद है
चलती है सर्द हवा
भटके हम है...

सबकी बारी है
एक न एक दिन आनी है
कैसा ख़ौफ, कैसा डर
जब राह सुहानी हैं...

चक्कर में है सभी
मुश्किल में मुस्कुराते है
हक़ीकत पता है
इसलिए इतराते है...

दिल, दिमाक कुछ नहीं 
मन पर, बस नहीं 
ख़ौफ से डर जबकी
कोई बुज़दिल नही... 

तकदीर ने मारी 
ठोकर, गिर गए है
निकल गए सब, हम
रास्ते भूल गए है...

हस्त रहा जमाना
चीखता बेगाना 
उतर चुकी हैं, इज्जत 
बचे केवल हम है...

ख़ामोशी ने मेरी 
बया कर ही दिया
जानते है सब
अनजाने हम है...

हौसले बुलंद है 
आँखे मंद है
चलती है सर्द हवा
भटके हम है...



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