कुछ गुस्ताखियाँ

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कुछ गुस्ताखियाँ

न दिल से, न दिमाक से, केवल प्यार से,
कुछ गुस्ताखियाँ ।।

नम है आँखे, तन्हा है राते, फिर भी मरती है
ताने, सारि बस्तिया। कुछ गुस्ताखियाँ ।।

जब जब रोये है हम, हँस रहा है यह जमाना
प्यार से कर या नफरत से, कुछ गुस्ताखियाँ ।।

मोत भी आये तो तेरे दर पर ही आये
ले जाये तेरी यादों को, करे नादानियाँ ।।

नफ़रात ही हो गई है जिंदगी से हमारी
टूट गई है सभी उम्मीदे, चारो तरफ है वीरानियाँ।।

साथ यदि तेरा होता, मुमकिन की कोई गम होता
लड़ जाते हम सभी से, मुरझाई न होती वादियाँ।।

पीछे छोड़ आये हम सभी की, निकल आये आगे
बो गांव और बो गली बुलाती हैं बो लडकियाँ।।

यादो के सागर में कब तक डुबकी लगाएंगे
मोती थे सब जो चुन लिए, बच गई है सीपियाँ।।
           
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