मैं शराबी तो नहीं

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मैं शराबी तो नहीं
पर हर नशा करके देखा हैं
प्यार अधूरा ही सही
पर पूरा करते हुए देखा है
मैं शराबी तो नहीं.....
बचपने में धुंए से खेली होली
खा गुटका तमाकू
मन की बात बोली
नशा ऐसा, न दिन में सूकुन
न रात में न रंगत
अजीव सी हालत है यर
डोर कही है, और
टूटी कहि ओर पतंग
बस लड़खड़ाते चले जा रहे है
वो जिससे प्यार कहते हैं
उसे निभाते जा रहे है
देखते है कब तक
प्यार निभा पाएंगे
साथ हम दे भी दे
यह शरीर तो नाशबर है
आज नही तो कल
विखर ही जाएगा
समेट कर इसे रख लेना
शायद यह भी किसी काम
तुम्हारे जरूर आएगा
आज वो दिन भी आ गया
मुझे लेने, लेनेवाला आ गया
ये यमराज, थोड़ा ठेहर
उसके आँखों से मैंने
झलकता पानी देखा हैं
में शराबी तो नहीं पर
हर नशा करके देखा हैं
प्यार अधूरा ही सही
पर पूरा करते हुए देखा है
मैं शराबी तो नहीं....

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