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| चेहरे की चमक |
यह सब चेहरे की चमक है
इसके अलावा कुछ भी नही
आँखों के सामने मंजर हैं
सारि जमी बंजर है
कटरा कटरा कटरा प्यासा
और पानी की बूंद एक नही
यह सब....
हवश के पुजारी है सब
प्यार मोहब्बत कुछ नही
लेला मजनु होंगे कोई
भूत है बो वर्तमान नही
यह सब....
देखे है हमने भी बहुत से नजारे
समय के साथ बदले है बीचारे
रंगत थी जो सब चली गई
बंजर जमी है अंकुर एक नही
यह सब....
कसमे खाया करते थे जो
आज खा रहे हमीको वो
वादे चाँद सितारे के किये
अब पास खुद भी नही
यह सब.....
यह सब चेहरे की चमक है
इसके अलावा कुछ भी नही
( अक्सर हम यह सोचते है की उनसे मिलकर हमारी जिंदगी में बहुत सारे बदलाब आ जाएंगे या उनसे मिलकर हमारे जिंदगी की सभी खुसिया मिल जायगी, तो हम यह गलत सोचते है, हमे कोई सी चीज जो आज अच्छी लग रही हैं, शायद कल भी अच्छी लग सकती है पर उसका हमेशा एक जैसा रहना मुमकिन नहीं हॉ, पर हम भी तो एक ही चहरे को बार-बार नही देख पाते है न समय के साथ हमारी सोच-विचार और पसंद में भी बदलाब आ जाता है इसलिए हमें जब भी किसी से प्यार करना हो या उसके साथ जीवन यापन करना हो तो केवल चेहरे की चमक को न देखे बल्कि उसके दिल में क्या है इस बारे में भी थोड़ा सोच ले इस कविता का मुख्य उद्देश्य यही था हालांकि एक प्रकार का स्पष्ट कविता में दर्शया नही गया है कविता में इसे नेगेटिव सेंस में लिया गया है। )

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