'वाट्सएप की दीवानगी'

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है माहौल बड़ा निराला
खोल रखी वाट्सएप की शाला
फेसबुक को पीछे छोड़ कहीं
लगा के उसमे ताला .....
कब कौन किसके साथ
चैटिंग करे आधी रात
माँ देख हैरान
नये फोन का कमाल
पिता को कुछ समझ न आये
बेटी को पास बुलाये
हमे भी समझा दो
जागने का राज बता दो
बाप ने पूछा यह सबाल
बेटी के हल थे बेहाल
वाट्सएप का है यह जाल
कैसे बताऊ पिता को राज
कई बिगड़ न जाये बात
कोई न दे मेरा साथ
किसी तरह मेने घुमाया
एग्जाम का बहाना बनाया
पिता ने मुझे समझाया
हाथ पकड़ पास बुलाया
है यह दुनिया नादान
बनी रहना तू अनजान
बात कर कोई रोक नही
जिंदगी है कोई जोक नही
नादान पर थोड़ा समझना
किसी उलझन में न पड़ना
ऐसी कोई बात नही
लो न टेंशन कही
मुझ पर विश्वास करो
मोबाइल मेरा रिचार्ज करो
लड़की की देख नादानी
पिता ने बात मानी
वाट्सअप है बही पुराना
बस है रूप बदलना
पिता को ऐसा उलझाया
की कुछ समझ न आया
फिर से रिचार्ज कराया
399 का पैक डालाया
अब चैटिंग करे अनजान से
एक नही चार से
क्या होगा कोन जाने
वाट्सअप की भाषा
वाट्सअप जाने
10 दिनों के बाद
हालात थे नज़ाद
सो न पाई एक रात
चारो में से न था कोई साथ
पिता भी थे नाराज
देख बेटी का हाल
बोल न पाये कुछ
पर थे कुछ खुस
शायद बेटी सुधरेगी
वाट्सअप को भूलेगी
हालात में कुछ सुधार आया
वाट्सअप को दुवारा
इंस्टॉल कराया
फिर माहौल बनाया
गब्बर इज बेक
स्टेटस डालाया
क्योंकि, है माहौल बड़ा....
---'दीपक पवार (गुस्ताख़)'
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